[Intro]
अशोक वाटिका मौन रही,
माता सीता अडिग रहीं...
सोने की लंका झुका न सकी,
सत्य की लौ भीतर जली।
[Verse 1]
मुद्रिका लेकर पहुँचे लंका,
पवनपुत्र बलवान...
माता ने देखा, आशा जागी—
संदेश था—सिया के राम!
गरजे अंजनीपुत्र अपार,
दहला रावण का दरबार।
पूँछ जली तो लंका दहकी,
रात बनी अंगार ही अंगार।
[Pre-Chorus]
लक्ष्मण साथ, सुग्रीव संग,
जामवंत का धीर ज्ञान...
अंगद का अडिग चरण कहे—
लौटेगा माता सीता का मान!
[Chorus]
सिया राम... सिया राम...
गूँजे नभ में पावन नाम।
माता सीता का मान अटल,
टूटा रावण का अभिमान।
सिया राम... सिया राम...
जीत गया सत्य का अभियान।
रावण गिरा, दशहरा कहे—
धर्म के आगे झुके अभिमान!
[Verse 2]
नल-नील ने सेतु रचाया,
सागर ने दी राह...
वानर सेना बढ़ती आई,
लंका तक पहुँची विजय की चाह।
विभीषण ने सत्य अपनाया,
छोड़ दिया मिथ्या अभिमान।
धर्म जहाँ, वहीं अपना घर—
यही बना उनका सम्मान।
मेघनाद की शक्ति लगी,
मौन हुआ रण एक पल...
द्रोणगिरि लेकर आए हनुमान—
लक्ष्मण में लौटा फिर बल!
[Bridge]
कुंभकर्ण गिरा...
मेघनाद गिरा...
टूटी लंका की हर ढाल।
दस दिशाओं में रण पुकार—
अब होगा अंतिम संग्राम!
एक ओर दशानन का दंभ...
एक ओर—
सिया के राम!
[Pre-Chorus]
सिया के राम ने धनुष उठाया,
धीरे थमा सारा आसमान...
प्रत्यंचा गूँजी—
अग्निबाण छूटा—
काँप उठा लंका का अभिमान!
धरती पर जब गिरा दशानन,
थम गया रण, थमा तूफ़ान...
माता सीता का मान लौटा—
जीत गया सत्य, झुका अभिमान!
[Final Chorus]
सिया राम... सिया राम...
गूँजे धरती, गूँजे आसमान!
हनुमान की भक्ति का बल,
लक्ष्मण की निष्ठा महान।
सुग्रीव, अंगद, जामवंत संग,
सबने लिखा विजय का गान।
रावण गिरा—दशहरा जगा,
सत्य बना विजय की पहचान!
सिया राम...
सिया राम...
सियावर रामचंद्र की जय!
पवनसुत हनुमान की जय!© 2026 TATVABEATZ™. Lyrics are displayed for the official track page.