[INTRO]
सरयू पर ठहरी
चाँदी-सी रात
दूर क्षितिज से
आई सौगात
दीप सजे हैं
जागा इंतज़ार
आज अवध में
लौटे सीताराम
[VERSE 1]
बरसों की दूरी
बीता विराम
सूनी थी राहें
आए हैं राम
आँखों में ठहरा
दीपक-सा प्यार
हर चौखट बोले
कितना इंतज़ार
छत पर उजास
गली में उजास
साँसों में लौटा
फिर से विश्वास
दूर से आती
कदमों की आहट
अवध के मन में
जागी है चाहत
[PRE-CHORUS]
दीप जलाओ
द्वार सजाओ
रात को जगमगाने दो
जो था बिछड़ा
जो था टूटा
आज उसे घर आने दो
[CHORUS]
राम घर आए
अवध मुस्काए
जगमग हुआ ये आसमान
सीता संग आए
मन लौट आए
फिर जागा हर इक अरमान
ॐ श्री सीतारामाभ्यां नमः ॥ — (श्री सीता और राम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita and Ram.)
ॐ श्री सीतारामाय नमः ॥ — (श्री सीताराम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita-Ram.)
[POST-CHORUS]
अवध जागी
रात सँवरी
हर खिड़की में
लौ फिर निखरी
घर का रस्ता
दिल ने पाया
लंबा सफ़र
आज थमाया
[VERSE 2]
कौसल्या के नयना — (कौसल्या की आँखें) — (Kausalya's eyes)
भीगे अपार
भरत के हियरा में — (भरत के हृदय में) — (In Bharat's heart)
उमड़ी बहार
जन-जन के चेहरे
दमके हज़ार
फूलों से सज गए
आँगन-द्वार
कोई न पराया
कोई न दूर
हर मुखड़े पर
छलका है नूर
जहाँ प्रेम बसता
वहीं घर बसता
जहाँ मन मिलता
वहीं अवध बसता
[PRE-CHORUS 2]
दीप जलाओ
द्वार सजाओ
रात को जगमगाने दो
जो था बिछड़ा
जो था टूटा
आज उसे घर आने दो
[CHORUS]
राम घर आए
अवध मुस्काए
जगमग हुआ ये आसमान
सीता संग आए
मन लौट आए
फिर जागा हर इक अरमान
ॐ श्री सीतारामाभ्यां नमः ॥ — (श्री सीता और राम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita and Ram.)
ॐ श्री सीतारामाय नमः ॥ — (श्री सीताराम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita-Ram.)
[BRIDGE]
हृदये ज्योतिर्दीप्यताम् — (हृदय में ज्योति प्रकाशित हो।) — (May light shine within the heart.)
गृहे हर्षो वर्धताम् — (घर में हर्ष बढ़ता रहे।) — (May joy increase within the home.)
प्रेम सर्वत्र वर्धताम् — (प्रेम हर ओर बढ़ता रहे।) — (May love grow everywhere.)
करुणा नित्यं दीप्यताम् — (करुणा सदा प्रकाशित रहे।) — (May compassion shine forever.)
शान्तिः सर्वत्र वर्धताम् — (शांति हर ओर बढ़ती रहे।) — (May peace grow everywhere.)
धर्मः सर्वत्र दीप्यताम् — (धर्म हर ओर प्रकाशित हो।) — (May righteousness shine everywhere.)
मङ्गलं नित्यं वर्धताम् — (मंगल सदा बढ़ता रहे।) — (May auspiciousness always increase.)
ज्योतिः सर्वत्र दीप्यताम् — (ज्योति हर ओर प्रकाशित हो।) — (May light shine everywhere.)
[BUILD]
एक लौ से
सौ लौ जले
सौ लौ से
सब पथ खिले
पथ से आगे
मन भी खिले
मन से आगे
जग भी खिले
घर जो लौटे
मन भी लौटे
मन जो लौटे
बंधन टूटे
[FINAL CHORUS]
राम घर आए
अवध मुस्काए
जगमग हुआ ये आसमान
सीता संग आए
मन लौट आए
फिर जागा हर इक अरमान
ॐ श्री सीतारामाभ्यां नमः ॥ — (श्री सीता और राम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita and Ram.)
ॐ श्री सीतारामाय नमः ॥ — (श्री सीताराम को नमन है।) — (Salutations to Shri Sita-Ram.)
दीप जले तो
मन भी खिले
प्रेम से प्रेम
फिर आ मिले
घर जो लौटे
दिल भी मिले
हर हृदय में
अवध खिले
[FINAL POST-CHORUS]
अयोध्या...
घर की पुकार
अयोध्या...
मन का द्वार
लौट के आए
जो थे उस पार
अब न अधूरा
कोई इंतज़ार
[OUTRO]
सरयू पर ठहरी
चाँदी-सी रात
घर में उजाला
मन में प्रभात
सीता संग राम
लौटे इस बार
अयोध्या...
जगमग संसार