Hindi
Aadi Shakti Lyrics
From album Navshakti
[Intro]
हे माँ... हे माँ...
जग की जननी, जग की ज्योति,
आओ माँ, आओ माँ...
[Verse 1]
पर्वतराज की प्यारी बेटी, जग को सुख देने वाली,
विन्ध्य-हिमालय में बसने वाली, विष्णु-शक्ति निराली।
नीलकंठ की जीवनसंगिनी, जग की पालनहारी,
पाप मिटाकर सुख बरसाए, माँ करुणा की प्यारी।
[Chorus]
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, जय हो शैलकुमारी,
जय हो माँ, शिव की प्रियतमा, जग की पालनहारी।
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, संकट हरने वाली,
जय हो माँ, जय जगदम्बे, जय माँ शक्तिशाली।
[Verse 2]
देवों पर तुम कृपा बरसाओ, दुष्टों का मद तोड़ो,
तीनों लोकों का सुख सँवारो, पापों के बंधन छोड़ो।
मधु-कैटभ के बल को हरकर धर्म-ध्वजा लहराई,
हिमगिरि की ऊँची चोटी पर दिव्य ज्योति बन छाई।
कदम्ब वन में हँसती माता, मधुर तुम्हारी वाणी,
जगदम्बा तुम, मेरी अम्बा, तुमसे दुनिया सुहानी।
[Chorus]
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, जय हो शैलकुमारी,
जय हो माँ, शिव की प्रियतमा, जग की पालनहारी।
[Verse 3]
शत्रु-दल के शीश गिराए, रण में रूप तुम्हारा,
मदमस्त गज भी काँप उठे जब गूँजा जय-जयकारा।
अपनी भुजा के प्रबल प्रहार से दानव दल संहारे,
सिंह-समान पराक्रम लेकर धर्म के दीप सँवारे।
रण में जब अत्याचार बढ़ा, तुमने शक्ति उठाई,
शिव को दूत बनाकर माता, दानव सभा हिलाई।
दुष्ट विचार, अधर्म, अहंकार—सबका अंत किया माँ,
सत्य और धर्म बचाने को विकराल रूप लिया माँ।
[Chorus]
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, दुर्गति हरने वाली,
जय हो माँ, जय जगदम्बे, जय माँ शक्तिशाली।
[Verse 4]
शरण पड़े जो, उसे अभय दो, ऐसी दया तुम्हारी,
त्रिशूल उठे तो काँपें दानव, मिटती विपदा सारी।
दुन्दुभियों से दिशाएँ गूँजें, देव तुम्हें गुण गाएँ,
तेरी विजय के मंगल स्वर से तीनों लोक समाएँ।
एक हुंकार से धूम्रलोचन राख हुआ रणमाहीं,
रक्तबीज की हर बूंद मिटाई, शक्ति रुकी न कहीं।
शुम्भ-निशुम्भ के गर्व को तोड़ा, रण में विजय तुम्हारी,
धर्म बचाने प्रकट हुई माँ, आदिशक्ति अवतारी।
[Chorus]
धिन-धिन धा, धिन-धिन धा, रण में शक्ति निराली,
जय-जय माँ, जय-जय माँ, दुर्गा सिंह सवारी।
धिन-धिन धा, धिन-धिन धा, गूँजे दुनिया सारी,
जय-जय माँ महिषासुरमर्दिनी, जय माँ शक्तिशाली।
[Verse 5]
धनुष-बाण से रण में उतरी, कंगन झन-झन बोले,
चतुरंगिणी सेना के आगे दानव डगमग डोले।
स्वर्ण-प्रभा से दमके शस्त्र और रणभूमि मुस्काई,
तेरी शक्ति देख स्वयं मृत्यु भी माँ शीश झुकाई।
देवांगनाएँ नृत्य करें जब विजय तुम्हारी गाएँ,
मृदंगों की धिमि-धिमि धुन पर स्वर्ग-सुमन बरसाएँ।
झन-झन नूपुर, मधुर तुम्हारा दिव्य नृत्य मन मोहे,
शिव भी तेरे लास्य को देखें, प्रेम-सुधा मन सोहे।
[Chorus]
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, जय हो शैलकुमारी,
जय हो माँ, शिव की प्रियतमा, जग की पालनहारी।
[Verse 6]
कमल-समान तुम्हारा मुखड़ा, चाँद-सी उजियारी,
सुंदर नयनों की चंचलता, छवि है सबसे न्यारी।
वन-उपवन में फूल खिले जब चरण तुम्हारे आएँ,
हंस, भ्रमर और कोयल मिलकर तेरी महिमा गाएँ।
पीत-वसन की दिव्य प्रभा से चंद्रकिरण शरमाए,
चरण-नखों की ज्योति के आगे रत्न-मुकुट झुक जाएँ।
सूरज का भी तेज तुम्हारी ज्योति सामने हारे,
कार्तिकेय की जननी माता, देव सभी गुण गाएँ।
[Verse 7]
राजा सुरथ और समाधि ने तेरी शरण जो पाई,
ज्ञान मिला और मन की गहरी निद्रा दूर भगाई।
जो प्रतिदिन तेरे चरण-कमल को प्रेम सहित अपनाए,
उसके जीवन में सुख, शांति और मंगल दीप जलाए।
तेरे चरण ही परम धाम हैं, यही हृदय ने माना,
तेरी कृपा से भक्त को मिलता जीवन का ठिकाना।
पावन जल से जो अभिषेक कर प्रेम-दीप जलाए,
तेरी करुणा उसकी झोली सुख-समृद्धि से भर जाए।
[Bridge]
चाँद-सा निर्मल तेरा मुखड़ा, शीतल छाया देता,
जिस पर तेरी कृपा हो माता, भाग्य स्वयं मुस्काता।
‘शिवा’ नाम का धन मिल जाए, फिर क्या शेष रहे माँ,
तेरी शरण में जो भी आए, उसका क्लेश ढहे माँ।
मैं दीन खड़ा तेरे द्वारे, करुणा मुझ पर करना,
जग की जननी, मेरी माता, दुख का सागर हरना।
जो मेरे हित उचित हो माता, वही मुझे दे देना,
मन के सारे ताप मिटाकर चरणों में ले लेना।
[Chorus]
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, जय हो शैलकुमारी,
जय हो माँ, शिव की प्रियतमा, जग की पालनहारी।
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, संकट हरने वाली,
जय हो माँ, जय जगदम्बे, जय माँ शक्तिशाली।
जय हो माँ, करुणामयी माँ, भक्तों की रखवाली,
जय हो माँ, त्रिभुवन जननी, ज्योति तुम्हारी निराली।
जय हो माँ, महिषासुरमर्दिनी, गूँजे दुनिया सारी,
जय हो माँ... जय जगदम्बे...
जय माँ शक्तिशाली...
[Outro]
हे माँ...
जय जगदम्बे...
जय महिषासुरमर्दिनी...
जय माँ... जय माँ...© 2026 TATVABEATZ™. Lyrics are displayed for the official track page.