Jinhe Shri Krishn Ne Shyaam Kaha (Khatoo Shyaam) cover art

Official Lyrics

Barbarik

Official Hindi lyrics published by TATVABEATZ™.

Track NameBarbarik
Album TitleJinhe Shri Krishn Ne Shyaam Kaha (Khatoo Shyaam)
Lyrics LanguageHindi

Hindi

Barbarik Lyrics

From album Jinhe Shri Krishn Ne Shyaam Kaha (Khatoo Shyaam)

[INTRO] रण से पहले रात थी, राहों में धूल थी, दूर कहीं रण जाग रहा, आँखों में एक उसूल था। माँ का दिया हुआ वचन... साँसों के साथ था। [VERSE 1] धूल भरी उस राह पर, रण का बुलावा था, कंधे पे धनुष, आँखों में सीधा इरादा था। घटोत्कच का बेटा मैं, भीम का खून सही, पर माँ को दिया जो वचन—उससे बड़ा कुछ नहीं। तीन बाण तरकश में, इतना ही अभिमान, नज़र जहाँ ठहर जाए, बदल सके मैदान। पर शक्ति का नशा नहीं, मन में एक ही बात, जिसकी पंक्ति टूट रही—मैं खड़ा उसी के साथ। [PRE-CHORUS] जीत के संग लाखों हैं, हार में कौन खड़ा? माँ, तेरा वचन कहता— जहाँ कोई नहीं... मैं वहाँ। [CHORUS] हारे की तरफ़, मैं हारे की तरफ़, दुनिया जिधर न जाए, मैं उस तरफ़। जीत के तो साथी सौ, हार में कोई नहीं, जिसका कोई साथ नहीं—मैं उसकी तरफ़। हारे की तरफ़... हारे की तरफ़... मेरा वचन मुझे ले चला हारे की तरफ़। [POST-CHORUS] हारे की तरफ़! मैं हारे की तरफ़! जिसे सहारा चाहिए— मैं उसकी तरफ़! [VERSE 2] ना कौरव का मोह मुझे, ना पांडव की शान, जिस पल जो कमज़ोर पड़े, उसके नाम कमान। पलटे अगर पलड़ा कभी, मैं राह बदल दूँगा, माँ को दिया है जो वचन, मैं उससे न हटूँगा। नामों से क्या तय होगा कौन बड़ा, कौन कम? हर एक जीत के पीछे छुपा किसी का ग़म। मैं ताज नहीं माँगूँगा, ना जीत का सम्मान, जहाँ उम्मीद टूट रही—उधर चलेंगे बाण। [PRE-CHORUS] रण पूछेगा किसका हूँ, मैं नाम नहीं लूँगा। जिस ओर उम्मीद बचे, मैं उस ओर मुड़ूँगा। [CHORUS] हारे की तरफ़, मैं हारे की तरफ़, दुनिया जिधर न जाए, मैं उस तरफ़। जीत के तो साथी सौ, हार में कोई नहीं, जिसका कोई साथ नहीं—मैं उसकी तरफ़। हारे की तरफ़... हारे की तरफ़... मेरा वचन मुझे ले चला हारे की तरफ़। [BRIDGE] जीत मुझे मिल भी जाए, क्या होगा उसका मान, अगर किसी की हार बने मेरी जीत की पहचान? माँ, तेरा एक वचन ही मेरे मन की राह, जिसे ज़रूरत सबसे ज़्यादा, मैं बनूँ उसकी बाँह। [BRIDGE LIFT] तीन बाण मेरे हाथ में, फिर भी सिर नहीं ऊँचा, रण अभी सामने है... और रास्ता है दूजा। कौन मिलेगा राह में, क्या माँगेगा मुझसे? आज जवाब नहीं मालूम— पर वचन नहीं बदलेगा मुझसे। [FINAL CHORUS] हारे की तरफ़, मैं हारे की तरफ़, दुनिया जिधर न जाए, मैं उस तरफ़। जीत के तो साथी सौ, हार में कोई नहीं, जिसका कोई साथ नहीं—मैं उसकी तरफ़। हारे की तरफ़! हारे की तरफ़! तीन बाण शांत सही, वचन मेरा जागता— जब तक कोई हार रहा, मैं हारे की तरफ़! हारे की तरफ़... मैं हारे की तरफ़... [OUTRO] जीत के संग दुनिया है... हार के संग कौन? माँ का वचन... मैं हूँ।