Hindi
Tere Kamre Ki Khidki Lyrics
From album Barso Ke Dhaagon Mei Bachpan
[Intro]
तेरे कमरे की खिड़की से
आज भी वही धूप उतरती है…
बस उसे आवाज़ देने वाली तू, कहीं दूर है।
[Verse 1]
बारिश में काग़ज़ की कश्ती हम दोनों बहाया करते थे
हार के भी अपनी बाज़ी तेरे नाम लगाया करते थे
माँ की डाँट से पहले मैं तेरा कसूर लिया करता था
तू रोती थी तो मैं भी चुपके-चुपके रोया करता था
[Pre-Chorus]
तब क्या मालूम था, एक दिन तू विदा हो जाएगी
इस घर की हर साँस में तेरी कमी रह जाएगी
[Chorus]
तेरे कमरे की खिड़की अब भी खुली रखता हूँ
आती-जाती धूप से तेरा पता पूछता हूँ
राखी के उस धागे को चुपके से छूता हूँ
जिसे मैं बचाता था, उसी में मैं बचता हूँ
[Verse 2]
तेरी किताबों में सूखे गुलाब रखे हैं
उनमें हमारे बेफ़िक्र जवाब रखे हैं
अलमारी की तह में वो पीला रिबन पाया
जैसे बीते मौसम ने फिर हाथ बढ़ाया
तू फ़ोन पे हँस के कहती है, “मैं बिल्कुल ठीक हूँ”
मैं तेरी साँसों में छुपा हर मौसम लिखता हूँ
[Pre-Chorus]
तू दूर सही, तेरी हर राह पे दुआ रखता हूँ
अपने हिस्से की हर खुशी तेरा नाम रखता हूँ
[Chorus]
तेरे कमरे की खिड़की अब भी खुली रखता हूँ
आती-जाती धूप से तेरा पता पूछता हूँ
राखी के उस धागे को चुपके से छूता हूँ
जिसे मैं बचाता था, उसी में मैं बचता हूँ
[Bridge]
मैं तेरा रखवाला था, ये भरम पाला था
तूने ही तो हर बार मेरा सिर सँभाला था
तेरी छोटी-सी दुआ में इतनी बड़ी छाँव थी
जिसे मैं सहारा समझा, वो मेरा सहारा था
[Final Chorus]
तेरे कमरे की खिड़की अब भी खुली रखता हूँ
हर राखी पर तेरी राह में धूप बिछाता हूँ
जिसे मैं बचाता था, ये सच अब कहता हूँ
तू जहाँ भी रहे बहना, मैं तेरा घर रहता हूँ
[Outro]
तेरे कमरे की खिड़की…
अब भी खुली रखता हूँ…© 2026 TATVABEATZ™. Lyrics are displayed for the official track page.